KSEEB SSLC Class 10 Hindi रचना अपठित गद्यांश

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Karnataka State Syllabus Class 10 Hindi रचना अपठित गद्यांश

1. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

वन और पर्यावरण का गहरा संबंध है। वन प्रकृति की अमूल्य संपदा है। वन जीवनदायक है। वन वर्षा लाने का कारण बनकर पर्यावरण की रक्षा करते हैं। वनों की कृपा से भूमि का कटाव रुकता है, सूखा कम पड़ता है तथा रेगिस्तान का फैलाव रुकता है। मानव सभ्यता-संस्कृति की रक्षा, जीवों की रक्षा, तरह-तरह की वनस्पतियों और औषधियों आदि की रक्षा के लिए वन संरक्षण आवश्यक हैं। पर्यावरण को ठीक रखने के लिए वनों के कटाव रोकना होगा।

प्रश्न :

  1. हमें वन संरक्षण क्यों करना चाहिए?
  2. वनों से क्या-क्या लाभ होते हैं?
  3. वन किसकी अमूल्य संपदा है?
  4. वन पर्यावरण की रक्षा कैसे करते हैं?

उत्तरः

  1. मानव सभ्यता-संस्कृति की रक्षा, जीवों की रक्षा, तरह-तरह की वनस्पतियों और औषधियों आदि की रक्षा के लिए वन संरक्षण आवश्यक हैं।
  2. वनों की कृपा से भूमि का कटाव रुकता है, सूखा कम पड़ता है तथा रेगिस्तान का फैलाव रुकता है।
  3. वन प्रकृति की अमूल्य संपदा है।
  4. वन वर्षा लाने का कारण बनकर पर्यावरण की रक्षा करते हैं।

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2. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिएः

मनुष्य सामाजिक प्राणी है। वह सभी कार्य अपने आप नहीं कर सकता है। वह दूसरों की सहायता लेता है। समाज में उसे अच्छे लोगों के साथ-साथ बुरे लोग भी मिलते हैं। यदि वह अच्छे लोगों की संगति में रहेगा तो उस पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। बुरे लोगों की संगति का बुरा प्रभाव पड़ता है। बुरे लोग स्वयं अपनी हानि करते हैं और समाज को भी नुकसान पहुंचाते हैं। मनुष्य को चाहिए कि वह अच्छे लोगों के साथ उठे-बैठे और अच्छा फल प्राप्त करे।

प्रश्न :

  1. मनुष्य कैसा प्राणी है?
  2. समाज में किस तरह के लोग रहते हैं?
  3. अच्छे लोगों की संगति से क्या होता है?
  4. अच्छा फल कैसे प्राप्त हो सकता है?

उत्तरः

  1. मनुष्य सामाजिक प्राणी है।
  2. समाज में अच्छे लोगों के साथ-साथ बुरे लोग भी रहते है।
  3. अच्छे लोगों की संगति में रहने से अच्छा प्रभाव पड़ता है।
  4. अच्छे लोगों के साथ उठने-बैठने से अच्छा फल प्राप्त हो सकता है।

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3. गद्यांश पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से छाँटकर लिखिए:

पुराण काल की बात है। एक जंगल में एक डाकू था। वह रोज यात्रियों को मारकर उनका धन लूट लेता था। वह बड़े क्रूर स्वभाव का था। एक दिन नारद मुनि भी उसकी पकड़ में आ गये। नारद मुनि ने मीठी-मीठी बातें करके उसका क्रोध शांत किया। इसके बाद उन्होंने उसको पाप और पुण्य कार्य के परिणामों के बारे में समझाया। डाकू का मन परिवर्तन हो गया। उसने बरसों, दृढ़ता से तपस्या की। इससे ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर खुश हुए। भगवान की कृपा से वह बड़ा ज्ञानी पुरुष और महर्षि बन गया। आगे चलकर उसने रामायण की रचना की। वह आदिकवि वाल्मिकी था। कहते हैं, यदि भगवान ने चाहा तो सबसे बड़ा पापी भी महापुरुष बन जाता है।

प्रश्न 1.
डाकू का स्वभाव कैसा था?
क) शांत
ख) क्रूर
ग) गंभीर
घ) कोमल।
उत्तर :
ख) क्रूर

प्रश्न 2.
नारद मुनि ने डाकू का मन परिवर्तन किस प्रकार किया?
क) मीठी बातों से
ख) जादू से
ग) उपाय से
घ) दंड देकर।
उत्तर :
क) मीठी बातों से

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प्रश्न 3.
वाल्मिकी ने किस ग्रंथ की रचना की?
क) महाभारत
ख) भगवद्गीता
ग) रामायण
घ) गिरिजा कल्याण।
उत्तर :
ग) रामायण

प्रश्न 4.
नारद मुनि ने किन परिणामों के बारे में समझाया?
क) धर्म-कर्म
ख) जात-पाँत
ग) भय-भक्ति
घ) पाप-पुण्य।
उत्तर :
घ) पाप-पुण्य।

4. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए:

रामायण शिक्षा का गहरा सागर है। इसमें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से सम्बन्धित शिक्षा के अनेक रत्न भरे हैं। ‘वाल्मीकि रामायण’ संस्कृत का आदिकाव्य है। हिन्दी में रामचरित का सर्वश्रेष्ठ गान तुलसीदास का ‘रामचरित मानस’ है। रामचरित मानस में अपने अधिकारों के लिए मनुष्य को राम की भाँति लड़ने की शिक्षा मिलती है। राम प्रजातंत्रवाद के महान समर्थक थे। वे सब कार्य प्रजा की इच्छा के अनुरूप करते थे। तभी तो आज तक दुनिया रामराज्य के स्वप्न देखती है। मानव के लिए जितनी शिक्षाएँ जीवनोपयोगी हो सकती हैं, वे सभी हमें रामचरित मानस में मिलती हैं।

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प्रश्न 1.
संस्कृत का आदिकाव्य कौन-सा है?
क) वाल्मीकि रामायण
ख) रामायण दर्शनम्
ग) रामचरित मानस
घ) महाभारत।
उत्तर :
क) वाल्मीकि रामायण

प्रश्न 2.
श्रीराम किसके महान समर्थक थे?
क) मार्क्सवाद
ख) तंत्रवाद
ग) प्रजातंत्रवाद
घ) लोकवाद।
उत्तर :
ग) प्रजातंत्रवाद

प्रश्न 3.
रामायण किसका गहरा सागर है?
क) प्रेरणा
ख) धन
ग) मूल्य
घ) शिक्षा।
उत्तर :
घ) शिक्षा।

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प्रश्न 4.
रामचरित मानस से कैसी शिक्षा मिलती है?
क) जीवनोपयोगी
ख) लोकोपयोगी
ग) समाजोपयोगी
घ) शिक्षणोपयोगी।
उत्तर :
क) जीवनोपयोगी

5. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिएः

हमारे देश की संस्कृति विश्व की सभी संस्कृतियों से प्राचीन है। आज हम पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध में अपनी महान संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। भगवान हमें अपनी महान परंपरा और संस्कृति को सुरक्षित रखने की शक्ति दे। हम यह नहीं कहते कि हम आधुनिक विचारों से दूर रहें। लेकिन इन्हें सूझ-बूझ के साथ स्वीकार करना चाहिए। देशवासियों में वैज्ञानिक दृष्टि पैदा की जाए ताकि वे अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधकार से निकलकर देश की प्रगति कर सकें। आध्यात्मिक शक्ति के साथ वैज्ञानिक तर्कशक्ति देश को ऊँचाई पर पहुंचा सकती है और इससे देश की अपनी पहचान बनती है।

प्रश्न :

  1. हमारे देश की संस्कृति कैसी है?
  2. भगवान हमें कैसी शक्ति प्रदान करें?
  3. देशवासियों में वैज्ञानिक दृष्टि क्यों पैदा करनी चाहिए?
  4. देश की पहचान कब बनती है?

उत्तरः

  1. हमारे देश की संस्कृति विश्व की सभी संस्कृतियों से प्राचीन है।
  2. भगवान हमें अपनी महान परंपरा और संस्कृति को सुरक्षित रखने की शक्ति प्रदान करें।
  3. देशवासियों में वैज्ञानिक दृष्टि पैदा की जाए ताकि वे अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधकार से निकलकर देश की प्रगति कर सकें।
  4. आध्यात्मिक शक्ति के साथ वैज्ञानिक तर्कशक्ति देश को ऊँचाई पर पहुंचा सकती है और इससे देश की पहचान बनती है।

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6. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

हास्य, नीरस-जीवन को सुखद बना देता है। हास्य का जादू सुगंध की तरह चारों ओर फैल जाता है। मनुष्य को जीवन में इतनी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है कि वह अपने जीवन को बहुत मुश्किल समझने लगता है। ऐसे कठिन जीवन को जीने योग्य बनाने के लिए जीवन में हँसने का अवकाश हो। हँसी के सहारे मनुष्य अपने कष्टों को भूलने का प्रयत्न करता है। तनाव, व्यस्तता, संघर्ष आदि आज के जीवन की सहज देन हैं। इनसे बचने के लिए यह आवश्यक है कि हम हँसना सीखें।

प्रश्न:

  1. नीरस-जीवन को सुखद कौन बनाता है?
  2. आज के जीवन की सहज देन क्या हैं?
  3. कठिन जीवन को जीने योग्य बनाने के लिए क्या जरूरी है?
  4. हास्य का जादू कैसे फैलता है?

उत्तरः

  1. नीरस-जीवन को हास्य सुखद बनाता है।
  2. तनाव, व्यस्तता, संघर्ष आदि आज के जीवन की सहज देन हैं।
  3. कठिन जीवन को जीने योग्य बनाने के लिए जीवन में हँसने का अवकाश हो।
  4. हास्य का जादू सुगंध की तरह चारों ओर फैलता है।

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7. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

गांधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। वे सत्य को भगवान मानते थे। अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म मानते थे। उन्होंने बचपन से ही अहिंसा का पालन करना सीखा। उनके सत्यवादी बनने की घटना बड़ी रोचक है। दूसरे बालकों की तरह वे भी बचपन में जिद करते थे, झूठ बोलते थे, गलतियाँ भी करते थे। किंतु उन्हें एक बार ‘राजा सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक देखने का मौका मिला। वे उससे अत्यंत प्रभावित हुए। इस नाटक को देखने के बाद गांधी जी ने सत्यवादी बनने का निश्चय किया।

प्रश्न :

  1. गांधी जी किसके पुजारी थे?
  2. बचपन में गांधी जी का स्वभाव कैसा था?
  3. गांधी जी के विचार में सबसे बड़ा धर्म कौन-सा है?
  4. गांधी जी किससे अत्यंत प्रभावित हुए?

उत्तरः

  1. गांधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे।
  2. बचपन में गांधी जी जिद करते थे, झूठ बोलते थे, गलतियाँ भी करते थे।
  3. गांधी जी के विचार में अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है।
  4. गांधी जी ‘राजा सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक से अत्यंत प्रभावित हुए।

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8. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी मानव है। मानव की जिज्ञासावृत्ति उसे पशुओं से भिन्न करती है। प्रकृति के रहस्यों को खोजने, उन्हें उपयोग में लाकर जीवन को सुखमय बनाने और ज्ञान विस्तार के मूल में उसकी जिज्ञासा ही है। अपनी जिज्ञासा से उसे यह लाभ मिलता है। मानव में एक विशेष गुण और है, वह है – सौंदर्यानुभूति। मानव सृष्टि के समस्त चराचरों में अपने इसी गुण से अच्छी और खराब वस्तुओं में भेद कर सकता है। अपने इस विवेक से ही मनुष्य ने ललित कलाओं का विकास भी किया है।

प्रश्न :

  1. मानव पशुओं से कैसे भिन्न है?
  2. जिज्ञासा से मानव को क्या लाभ है?
  3. मानव का विशेष गुण क्या है?
  4. अपने विवेक से मानव क्या कर सका है?

उत्तरः

  1. मानव की जिज्ञासावृत्ति उसे पशुओं से भिन्न करती है।
  2. प्रकृति के रहस्यों को खोजने, उन्हें उपयोग में लाकर जीवन को सुखी बनाने और ज्ञान विस्तार करने के मूल में जिज्ञासा ही है। जिज्ञासा से मनुष्य को यह लाभ मिलता है।
  3. मानव का विशेष गुण सौन्दर्यानुभूति है।
  4. मानव ने अपने विवेक से ललित कलाओं का विकास किया है।

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9. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

प्रायः अधिकांश लोग दूसरों के जीवन का अनुसरण करते हैं, इसी में उनको सुख मिलता है। अपनी ताकत को न पहचानकर दूसरों के पीछे निरुद्देश्य चलना केवल अंधानुकरण है। सड़क के किनारे पड़े सूखे पत्ते कमज़ोर और निर्जीव होने पर भी स्वयं को सबके समान गतिशील समझते हैं। दूसरों के बल पर जीने वाले, दूसरों की नीति की नकल करने वाले कभी प्रगति नहीं कर सकते। वास्तविक प्रगति के लिए मनुष्य को समय के साथ निज-बल से आगे बढ़ना चाहिए। निज-बल ही सर्वोपरि है, जो मनुष्य को जीवन की ऊँचाइयों तक पहुंचाता है।

प्रश्न :

  1. दूसरों को प्रायः सुख कैसे मिलता है?
  2. अंधानुकरण से क्या तात्पर्य है?
  3. सड़क के किनारे पड़े पत्ते कैसे हैं?
  4. मनुष्य जीवन में ऊँचाइयों तक कैसे पहुंच सकता है?

उत्तरः

  1. प्रायः अधिकांश लोग दूसरों के जीवन का अनुसरण करते हैं, इसी में उनको सुख मिलता है।
  2. अपनी ताकत को न पहचानकर दूसरों के पीछे निरुद्देश्य चलना केवल अंधानुकरण है।
  3. सड़क के किनारे पड़े सूखे पत्ते कमजोर और निर्जीव होने पर भी स्वयं को सबके समान गतिशील समझते हैं।
  4. वास्तविक प्रगति के लिए मनुष्य को समय के साथ निज-बल से आगे बढ़ना चाहिए। निज-बल ही सर्वोपरि है, जो मनुष्य को जीवन की ऊँचाइयों तक पहुंचाता है।

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10. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिएः

लोभ बहुत बड़ा दुर्गुण है। यह एक असाध्य रोग है। दुःख का मूल कारण ही लोभ है। धनी आदमी अधिक धन कमाने के प्रयत्न में लोभी बन जाता है। प्राप्त धन से वह कभी भी संतुष्ट नहीं हो पाता। भूखा पेटभर खाना मिलने पर तृप्त हो जाता है। लोभी की दुराशाएँ बढ़ती ही जाती हैं, इसलिए वह हमेशा अतृप्त ही रहता है। लोभ बीमारी का लक्षण है। संतोष निरोगता का लक्षण है। इसलिए मनुष्य को लोभ छोड़कर, जो प्राप्त है उसी में संतुष्ट रहना चाहिए।

प्रश्न :

  1. धनी आदमी क्यों लोभी बनता है?
  2. भूखा आदमी कैसे तृप्त हो जाता है?
  3. लोभी हमेशा क्यों अतृप्त रहता है?
  4. मनुष्य कैसे संतुष्ट रह सकता है?

उत्तरः

  1. अधिक धन कमाने के प्रयत्न में धनी आदमी लोभी बनता है।
  2. पेटभर खाना मिलने से भूखा आदमी तृप्त हो जाता है।
  3. दुराशाएँ बढ़ने के कारण लोभी अतृप्त रहता है।
  4. लोभ को छोड़कर, जो प्राप्त है उसी में संतुष्ट होने से मनुष्य संतुष्ट रह सकता है।

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11. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिएः

एक बार भीमराव अपने भाई के साथ पिता से मिलने जा रहे थे। उन दोनों ने एक बैलगाड़ी किराए पर ली। कुछ दूर जाने के बाद जब गाड़ीवान को पता चला कि बैलगाड़ी में बैठे दोनों लड़के महार जाति के हैं, तो उसने तुरंत गाड़ी रोक दी और उन्हें गाली देते हुए गाड़ी से नीचे उतार दिया। इस अपमान का बच्चों के कोमल मन पर गहरा आघात लगा। इन कटु अनुभवों ने बालक भीम के मन में विद्रोह का ऐसा बीज बो दिया, जिसने समय के साथ-साथ एक सक्रिय ज्वालामुखी का रूप धारण कर लिया। अस्पृश्यता, छूआ-छूत समाज का कलंक है। इन सब बातों पर विचार करते हुए भीम ने समाज में फैली इन कुरीतियों को मिटाने का दृढ़ संकल्प लिया। उन्होंने अपना सारा जीवन अछूतों को समानता और न्याय दिलाने में समर्पित किया।

प्रश्न :

  1. बच्चों के कोमल मन पर अपमान का क्या असर पड़ा?
  2. गाड़ीवान ने दोनों बच्चों को गाड़ी से नीचे किस कारण उतार दिया?
  3. भीमराव जी का जीवन किस कार्य के लिए समर्पित था?
  4. भीम ने कौन-सा दृढ़ संकल्प लिया?

उत्तरः

  1. इस अपमान का बच्चों के कोमल मन पर गहरा आघात लगा।
  2. गाड़ीवान को जब पता चला कि दोनों बच्चे महार जाति के हैं, तो तुरंत गाड़ी रोककर उन्हें गाली देते हुए नीचे उतार दिया।
  3. भीमराव जी का जीवन अछूतों को समानता और न्याय दिलाने के कार्य के लिए समर्पित था।
  4. भीम ने समाज में फैली अस्पृश्यता, छुआ-छूत जैसी कुरीतियों को मिटाने का दृढ़ संकल्प लिया।